
श्री सीता रामचंद्रस्वामी मंदिर, भद्राचलम
श्री सीता रामचंद्रस्वामी मंदिर, भद्राचलम
इस मंदिर का महत्व
गोदावरी के ऊपर भद्र पर्वत पर, सीता-लक्ष्मण सहित राम पूजे जाते हैं; भक्त रामदास द्वारा निर्मित इस मंदिर में, हर श्रीराम नवमी पर राम–सीता का दिव्य कल्याणम विशाल भीड़ के समक्ष संपन्न होता है।
इतिहास
भद्राचलम तेलंगाना में गोदावरी तट पर, राम को धारण करने की कामना करने वाले भक्त भद्र के नाम की पहाड़ी पर स्थित है। वर्तमान मंदिर 17वीं सदी में कंचेर्ल गोपन्ना — भक्त रामदास — ने बनवाया; राजस्व अधिकारी होते हुए उन्होंने राजकोष का धन मंदिर में लगाकर कारावास सहा, और उनकी राम-कीर्तनाएँ तेलुगु देश में आज भी प्रिय हैं।
वास्तुकला
नदी के ऊपर पहाड़ी पर द्रविड़ शैली में मंदिर उठता है; गर्भगृह में राम वैकुंठ राम रूप में, गोद में सीता और पार्श्व में लक्ष्मण के साथ विराजते हैं। नदी-तटीय परिवेश और भद्र पर्वत सन्निधि को गढ़ते हैं।
स्थल पुराण
परंपरा कहती है कि भक्त भद्र ने राम को अपने सिर पर धारण करने की प्रार्थना की, और वनवास से लौटते राम ने यहाँ वैकुंठ राम रूप में उसे दर्शन दिए। रामदास का कारावास और मुक्ति — जिसमें राम-लक्ष्मण के स्वयं हस्तक्षेप का गान होता है — मंदिर की सर्वाधिक प्रिय कथा है।
उत्सव
श्रीराम नवमी परम उत्सव है; राम–सीता का कल्याणम भव्य रूप से मनाया जाता है और समस्त तेलुगुजनों को खींचता है। कल्याणम के लिए भेजे जाने वाले मोती और भेंट उस दिन की परंपरा हैं।
दर्शन अनुभव
तेलुगु देश की राम-भक्ति का हृदय है भद्राचलम; रामदास की अपनी कीर्तनाओं में गाए जाने वाले श्रीराम नवमी कल्याणम में सम्मिलित होना इस क्षेत्र की आस्था के महान अनुभवों में एक है।